Uttarakhand News

Date: 2017-Sep-09

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हिमालय दिवस पर विशेष

हिमालय दिवस पर विशेष :जगत सिंह जंगली

 उत्तराखंण्ड में मिश्रित वनों की अवधारणा को को मजबूत करने और उसे धरती पर साकार करने में जगत सिंह ‘जंगली’ की बड़ी भूमिका है। रूद्रप्रयाग जिले के कोटमल्ला गांव निवासी 62 वर्षीय जगत सिंह को वन एवं पर्यावरण प्रेम ने ही उन्हें जंगली बना दिया। बुनियादी स्कूली शिक्षा पाए एवं बी.एस.एफ. से सेवानिवृत जंगली ने यह भी साबित कर दिखाया है कि प्रकृति से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता।

24 वर्ष की उम्र से मिश्रित वनों के रोपण और संरक्षण मे जुटे जंगली ने अपने गांव कोटमल्ला में दो हेक्टेयर से अधिक ऊबड़-खाबड़ पथरीली पहाड़ी को सालों की मेहनत के बाद वनखेती के रूप में बदल डाला। उन्होंने जमीन को ही नहीं बदला, बल्कि पर्यावरण और वनविज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले बड़े-बड़े वैज्ञानिकों की सोच भी बदल डाली। जंगली ने पंद्रह वर्षो की मेहनत के बाद विभिन्न ऊंचाईयों और पर्यावरणीय स्थितियों में उगने वाले लगभग 60 प्रजातियों के चालीस हजार से अधिक पेड़ों वाला मिश्रित वन विकसित किया।

इंदिरा गांधी वन मित्र पुरस्कार के साथ ही उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला द्वारा पुरस्कृत हो चुके जंगली के मिश्रित वन में चायपत्ती से लेकर हल्दी तक के पौधे लगाए गए हैं। जंगली के इस मिश्रित वन से अब गांव के लोगों को चारा पत्ती तो मिलती ही है, वन और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा भी मिलती है। जंगली से प्रेरणा लेकर अब आसपास गांव के लोग भी मिश्रित वन की इस पद्धति को अपनाने लगे हैं।

जंगली कहते हैं, ‘अगर सरकार मिश्रित वन के इस सूत्र को उत्तराखंड सहित देशभर में लागू करे तो यह पर्यावरण संरक्षण के साथ ही वनों को अधिक उत्पादक और अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम हो सकता है।  पहाड़ में अगर गांव के आसपास मिश्रित वन होंगे तो महिलाओं के लिए चारा पत्ती का संकट कितना कम हो जाएगा।’ एक सुखद पहलू यह भी है कि अब सिर्फ जंगली ही अपने अनुभव बांटने के लिए देशभर में नहीं घूमते बल्कि देशभर के वन एवं पर्यावरण पर अध्ययन कर रहे छात्र और शोद्यार्थी भी जंगली के जंगल को देखने पहुंचते हैं। 

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